शनिवार, 25 मार्च 2023

नाजुक रिश्ता और ज़िम्मेदारी

नाजुक रिश्ता और ज़िम्मेदारी

दुनिया में जो कुछ पाने लायक है उस पर वर्क करना पड़ता है। चाहे अच्छा करियर हो या अच्छे रिश्ते। कई बार लगता है बात नहीं बन पाएगी। और नहीं हो पाएगा। इसे छोड़ना पड़ेगा। मगर हम रिश्ते को ज़रूरी समझते हैं तो उसे बार-बार संवारते हैं। तब भी सामने वाले को मनाते हैं जब जानते थे कि हमारी गलती नहीं थी। तब भी हम सामने वाले को शर्मिंदा नहीं करते जब हम जानते थे कि उसी की गलती थी।

रिश्तों में कितनी ही बार ऐसा होता है जब आपको लगता है कि मैं इस आदमी के साथ नहीं रह सकती या मैं इस औरत के साथ नहीं रह सकता। मगर जैसे-तैसे खुद को संभाल के, अपने गुस्से को जज़्ब करके आप खुद को उस नाज़ुक पल से निकाल ले जाते हैं। फिर चीज़ें नॉर्मल हो जाती हैं और बाद में आपको इस बात का गर्व भी होता है कि कैसे उस नाजुक मौके पर मैं खुद पर काबू रख पाया।

कोई भी रिश्ता उन नाजुक मौकों पर खुद पर काबू रखने की एक लंबी श्रृंखला होता है। जिस रिश्ते पर 10-15 साल बाद आप गर्व करते हैं उसे आप न जाने कितने ही कमज़ोर क्षणों से बचाकर लाए होते हैं।

मगर Instant gratification (फौरी खुशी) के दौर पर में आज किसी में भी रिश्तों को वक्त देने का पेशंस नहीं। हर पहले झगड़े पर लगता है बहुत हो गया या ये इंसान मेरे लिए ठीक नहीं और आप Perfect इंसान की तलाश में Move on कर जाते हैं। वो Perfect इंसान जिसकी तलाश इंडियाना जोन्स के किसी खजाने से भी ज़्यादा मुश्किल है। जिसे ढूंढने के लिए आपके पास कोई नक्शा भी नहीं है। आप सिर्फ इस झूठे भरोसे से नए आदमी की तलाश में निकल पड़ते हैं ताकि उस रिश्ते से निकाल जाने के लिए खुद के सामने कोई रिवॉर्ड रख सकें।

इस सोच की वजह से आज रिश्ते आज रेडलाइट पर मिलने वाले किसी चाइनीज़ चार्जर से भी कम चलते हैं। मगर ऑनलाइन खाना और सामना ऑर्डर करने और रिश्तों में यही फर्क है। रिश्तों में कुछ भी Instant नहीं होता। यहां कुछ भी Tailor Made नहीं है। पसंद का सूट बनवाया जा सकता है मगर रिश्तों में समझ बनानी पड़ती है। यहां कोई आपका नाप नहीं लेगा बल्कि खुद आपको सामने वाले के दिल और समझ की गहराई नापनी होती है। उस रिश्ते की ज़िम्मेदारी लेनी होती है।

मगर ज़िम्मेदारी ऐसी चीज़ है कि न समझो तो इंसान अपने मां-बाप की भी नहीं समझता। समझो, तो सर्दी में नाइट ड्यूटी कर रहे गार्ड की भी फिक्र होती है। करियर में पीछे रह गए दोस्तों की भी चिंता होती है और अपने छोटे बच्चों को अकेला छोड़कर आने वाली कामवाली के लिए भी बुरा लगता है। आसपास मौजूद इतने सारे दुखों के बीच आप खुद को बेहद छोटा और असहाय पाते हैं। कामयाबी शायद कुछ और नहीं, बस अपने दायरे में आने वाले लोगों के दुखों की ज़िम्मेदारी उठा पाना है, न कि अपनी खुशियों में मगरूर रहकर हर किसी के प्रति आंख मूंद लेना, एक ज़रा सी बात पर उससे पिंड छुड़ा लेना। चले जाने का विकल्प हमेशा खुला होता है। साथ रहने के लिए बहुत कोशिश करनी पड़ती है। बशर्ते आप मानते हों कि साथ रहना ज़रूरी है। 
क्रेडिट–Neeraj Badhwar(लेखक–बातें कम scam ज्यादा)

मंगलवार, 21 मार्च 2023

राजनीति और चुनाव चिन्ह

 

राजनीति और चुनाव चिन्ह

थका-हारा मजदूर अभी-अभी सोया था, नींद की पहली ही पारी में खोया था।

तभी उसके गाल पर जोरदार तमाचा पड़ा, हड़बड़ा कर मजदूर हो गया खड़ा।

मजदूर बोला- अरे चोरों मेरा सब कुछ ले जाओ, मगर कमबख्तों, अँधेरे में यूँ हाथ-पैर तो न चलाओ।

आदमी बोले- हम चोर नहीं हम तो कांग्रेसी हैं।

अगर अँधेरे में यूँ हाथ-पैर न चलायेंगे, तो तुझे अपना चुनाव चिन्ह कैसे बतायेंगे।

मजदूर बोला- अगर सभी दल यूँ प्रैक्टिस में अपना चुनाव चिन्ह बतलायेंगे,

तो हम कहाँ जायेंगे, हाथी-हथौड़े बाले आ गए तो हम मारे जायेंगे।

कांग्रेसी बोले- अब मजदूर तुझे हमें जिताना है,

और जितनी जोर से तेरे गाल पर तमाचा पड़ा है, उतनी जोर से हाथ के पंजे वाला बटन दबाना है।

तभी मजदूर ने देखा, दरवाजे पर त्रिशूल लिए एक महात्मा खड़ा था।

मजदूर बोला- बाबा आप भी उम्मीदवार हैं,

महात्मा बोला- हाँ बच्चा हम तेरे वोट के तलबगार हैं।

मजदूर बोला- पर क्या आपका चुनाव चिन्ह ये त्रिशूल है।

महात्मा बोला- नहीं बच्चा हमारा चुनाव चिन्ह तो कमल का फूल है, अगर वोट न दिया तो फिर यह त्रिशूल है।

अगर वोट न दिया तो तेरी अंतड़ियों में उतार देंगे, और सीधा स्वर्ग सिधार देंगे,

कमल के फूल वाला ही बटन दबाना।

मजदूर के आँखों की गुल हो गयी बत्ती, धक्-धक् करने लगी छाती क्योंकि दरवाजे पर खड़ा था हाथी।

हाथी बोला – क्यों बे मजदूर तुझे कभी हमारा भी ख्याल आया है।

मजदूर बोला- माई-बाप आज कल तो आप और आपकी ही ‘माया’ है।

हम आपको भूल जाएँ हमारी क्या है औकात, हम जानते हैं आपके पंजे की त्रिज्या और अपने पेट का व्यास।

तभी कुछ देर बाद गले में बैलगाड़ी का पहिया डाले जनता दल वाले आये।

जनता दल वाले बोले- क्यों बे मजदूर आज तेरे दिल की सारी हसरतें निकाल दें,

और अपने गले का भार तेरे गले में डाल देंं,

मजदूर बोला-नहीं माई-बाप उसे तो आप ही डाले रहिये, मुझे क्या करना है कहिये।

जनता दल वाले बोले- अगर खुद को पहिये के भार से चाहता है बचाना,

तो वैलगाड़ी के पहिये वाला ही बटन दबाना।

मजदूर था हैरान, कैसे-कैसे प्रत्याशी, कैसे-कैसे निशान, लेकिन देखा विधि का विधान।

मजदूर वेचारा डर गया, और चुनाव वाले दिन बिना वोट दिए ही मर गया.


शुक्रवार, 3 मार्च 2023

क्या आपने कभी सोचा है कि मैं इस दुनियां में क्यों हूं?

 क्या आपने कभी सोचा है कि मैं इस दुनियां में क्यों हूं?

हम सभी के मन में इस सवाल के विभिन्न उत्तर हो सकते हैं, क्योंकि हमने अपने लिए विभिन्न उद्देश्य बनाए हैं। कुछ इन्सान अपने उद्देश्यों को पूरा कर लेते हैं और कुछ परिस्थितियों और परेशानियों के कारण पूरा नहीं कर पाते। परन्तु मेरा मानना है कि हर इन्सान का प्राथमिक उद्देश्य ये होना चाहिए कि हमें इस संसार को और बेहतर सभी के रहने योग्य जगह बनाना है। बेहतर मतलब जहां इंसानियत, प्रेम, सद्भाव, दया एवं नैतिक मूल्यों वाले सज्जन इन्सान रहते हों। लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाते क्योंकि शायद ये बात दिमाग में नहीं आती या फिर हम करना नहीं चाहते। परन्तु क्या ये संभव है कि कोई अकेला इन्सान यह काम  कर सकता है। नहीं। इसके लिए हर किसी को अपने स्तर पर प्रयास करना पड़ेगा। परन्तु हम अपने जीते जी क्या कर सकते हैं। हमें अपनी संतान को संस्कारवान बनाना होगा। कल्पना कीजिए कि इस समाज में चारों ओर अराजक, कामी, क्रोधी, झूठ, पाखंड, ईर्ष्या, द्वेष, लालच से भरे हुए लोग रह रहे हैं तो क्या ये दुनिया नरक से भी बदतर जगह नहीं हो जायेगी। ये बहुत मुश्किल भी है कि हम हर किसी को सुधार पाएं, सच्चाई तो ये है कि हम लोग खुद इन सब बुराइयों के शिकार हैं। तो कम से कम हमारे बाद आने वाली पीढ़ी को इन बुराइयों से बचा सकते हैं। जिससे कि इस दुनिया में उन्हें एक अच्छा सामाजिक परिवेश मिले। हमारे मां बाप ने यदि हमें अच्छी परवरिश नहीं दी होती तो क्या हम पृथ्वी पर बोझ के समान नहीं होते। मेरा मानना है कि हर पीढ़ी का ये उत्तरदायित्व होना चाहिए कि वो आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाए और अच्छी से अच्छी परवरिश दे जिससे ये दुनिया एक बेहतर जगह बन पाएगी और भविष्य में आने वाले लोग इसे और बेहतर बनायेंगे। और यदि हम इतना कर पाए तो हमारे जीवन का प्राथमिक उद्देश्य पूरा हो जाएगा और हमारा इस दुनिया में जन्म लेना सफल होगा।

बुधवार, 7 दिसंबर 2022

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ खास बातें।

दोस्तों, आज आपको एक बात बताते हैं, पता है आपको? कोई बाहर का चिकित्सक उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बागपत, मुजफ्फर नगर, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद आदि किसी नगर में आकर औषधालय नहीं खोल सकता है,

क्यूँ ?

क्योंकि उसका क्लीनिक चलेगा ही नहीं।

कठिनाई ये है कि यहाँ के रोगी का रोग मात्र यहाँ का चिकित्सक ही समझ सकता है, और किसी के वश की बात नहीं।

कुछ रोग ऐसे हैं कि जैसे:

"गात म धूम्मा सा उठे" (आंतो मे मरोड़)

"जी कुलगुला" (घबराहट)

"आँखु म त झझल सी लिकडे " (आँख में जलन) 

"गात में उचाटी सी लगरी "(आंतो मे गड़बड़) 

"पेट मे धुड़क धुड़क हो री (वायु का प्रकोप) 

"हरकत होरी गात में" (आंतो मे हलचल) 

"कालजा लिकड़ लिकड़ जा (चक्कर आना)

"सिर मै चिड़िया सी बोल्ले "(उच्च रक्तचाप) 

"गात मै तरेड़ सी पाटटे "(हृदय घबराना)

"नू होरा जण लठों ने पीट स्क्खी मझे (शरीर में पीड़ा)

"बस नू जी करे जुक्कर रोउ रोउ चली जउ (निम्न रक्तचाप)

"हाथ पाम म कीड़ी सी चलरीह (शरीर सुन हो जाना)

"पूरा दिन नू सिमझ में नई आत्ता के में के करू के नी" (ये समझ नहीं आ रहा है कि मैं करूँ तो क्या)

"जी कच्चा हो रहा" (उलटी आना)

और सबसे अंत में जिसका अर्थ तो कुछ स्थानीय चिकित्सक भी नहीं समझ पाए

"शरीर में दर्द नि होरा चस चस होरी"

कोई मुझे इसका अर्थ बताएगा?😊😊

पढ़ने के लिए धन्यवाद।

रविवार, 13 नवंबर 2022

क्या भगवान राम जातिवादी थे?

विकास दिव्यकीर्ति सर आजकल किस विवादित विषय के कारण चर्चा में हैं?

विकास दिव्यकीर्ति सर दृष्टि इंस्टीट्यूट जो कि आईएएस के लिए तैयारी करवाती है उसके डायरेक्टर हैं। उन्होनें अपनी क्लास में बाल्मिकी रामायण के उत्तर कांड के एक प्रसंग का वर्णन किया, जिसके अनुसार भगवान राम ने शंभूक नामक एक शुद्र को सिर्फ इसलिए मृत्युदंड दिया क्योंकि उसने वेदपाठन करने का अपराध किया था। और उसके ऐसा करने से राज्य में अराजकता और प्राकृतिक आपदा का संभावित खतरा हो सकता था। इस प्रसंग के द्वारा ये सिद्ध होता है कि राम स्वयं जातिवादी थे। बस इसी बात का विवाद है कि उन्होंने जिस प्रसंग का जिक्र किया उसकी वास्तव में क्या प्रामाणिकता है। और यदि प्रामाणिकता है तो क्या भगवान राम सचमुच जातिवादी थे। 

वैसे यदि देखा जाए तो ये प्रसंग भगवान राम के व्यक्तित्व पर प्रश्न चिन्ह तो अवश्य डालता है, अब जहां तक प्रामाणिकता की बात है तो मेरे विचार से बाल्मिकी रामायण को तो बिल्कुल प्रामाणिक माना जाना चाहिए। परंतु इसमें जो उत्तरकांड है वो मुझे कहीं न कहीं संदेहास्पद लगता है। संदेह इस बात का है कि इसे स्वयं महर्षि बाल्मीकि ने नहीं बल्कि शायद बौद्ध धर्म प्रचारकों ने बड़ी साजिश द्वारा जबरदस्ती रामायण में थोप दिया। और बाद में गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में भी उसी आधार पर उत्तरकांड जोड़ दिया। अतः उत्तरकांड की विश्वसनीयता ही संदेहास्पद है। बाकी पाठकगण मेरे विचार से कितना सहमत हैं, अपनी राय टिप्पणी के माध्यम से अवश्य दें। और कृपया मुझे फॉलो करना न भूलें।

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

रेलवे भर्ती बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया, मेरिट सूची, एवं पद वरीयता क्रम आदि क्या है?

रेलवे भर्ती बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया, मेरिट सूची, एवं पद वरीयता क्रम


भारतीय रेलवे की सबसे केंद्रीयकृत व्यवस्था में सबसे ऊँचे पायदान पर एक रेलवे बोर्ड होता है।

> जिसमे एक रेलमंत्री, 2 रेलराज्य मंत्री, और 6 मेम्बर होते हैं, जो रेलवे के 6 विभिन्न विभागों के प्रमुख होते है।

> इनके नीचे भारतीय रेलवे को प्रसाशनिक प्रबंध की दृष्टि से 17 भागों में बाँटा गया हैं जिसे "रेलवे जोन" कहते हैं जिनका प्रमुख GM (जनरल मैनेजर) कहा जाता है।

> हर जोन में कम से कम 3 और अधिक से अधिक 8 डिविजन होते हैं. हर डिविजन का प्रमुख DRM कहलाता है।

> हर जोन के विभिन्न डिविजन को ग्रुप-सी कर्मचारियों की आवश्यकता होती है‌ जिनकी आपूर्ति के लिये RRB की स्थापना की गयी है।

भारत में इस समय 21 RRB कार्यरत हैं। इसके अलावा SSC के माध्यम से भी स्टाफ आते हैं।

(नोट:- ग्रूप -D स्टाफ की अपूर्ति RRC के माध्यम से होती है)

> हर RRB के क्षेत्राधिकार में कुछ‌ Railway Divisions आते हैं। किसी भी RRB के साईट पर आप देख सकते हैं की वो किन किन रेलवे डिविजन के लिये योग्य अभ्यर्थियों को चुन कर भेजेगा।

चयन की प्रक्रिया :-

सबसे पहले रेलवे का हर डिविजन स्टाफ की सूची बनाता है, कि उनको किन किन प्रकार के पदों के लिये कितने स्टाफ की आवश्यकता है। और उसे रेलवे बोर्ड की स्वीकृति के लिये दिल्ली भेज दिया जाता है।

> स्वीकृति मिलने के बाद RRB को चयन प्रक्रिया आरंभ करने के लिये अनुदेश दे दिये जाते हैं। साथ ही हर प्रकार के पद के सन्दर्भ में गाइडलाईन भी बता दी जाती है। शैक्षणिक योग्यता, ग्रेड पे, सलेबस, सायको आदि क्या और किस स्तर का होना चाहिये।

> अब RRB विज्ञापन जारी कर योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन माँगता है। आवेदन मिलने के बाद स्क्रूटनी की जाती है और योग्य छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिये बुलावा पत्र जारी किये जाते हैं।

(इस बीच RRB परीक्षा आयोजित करने की सारी व्यवस्था कर लेती है)

> दो चरणों की लिखित परीक्षा (ऑन लाईन) आयोजित की जाती है।

> परीक्षा में 4 वैकल्पिक उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। समय सीमा, निगेटिव मार्किंग इत्यादि के लिये स्पष्ट नियम निर्धारित किये जाते हैं।

> परीक्षा में प्राप्त अंको के नार्मलाईजेशन के बाद 8 गुने लोगों को टायपिंग और सायको टेस्ट के लिये बुलाया जाता है।

> जबकि इस समय तक नॉनटायपिंग और नॉनसायको वाले पदों के रिजल्ट जारी नहीं किये जाते हैं।

> सारी परीक्षा और टेस्ट हो जाने के बाद हर पदों के विरूद्ध एक गुना रिजल्ट प्रत्येक कटेगरी में जारी किया जाता है। साथ ही 30% अतिरिक्त वेटिंग लिस्ट वाला रिजल्ट भी जारी किया जाता है।

> एक गुना रिजल्ट और 30% एक्स्ट्रा रिजल्ट में जितने भी अभ्यर्थी आते हैं, सभी को सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिये बुलाया जाता है।

> सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के दौरान ही निम्नलिखित चीजें भी मिलान की जाती हैं –

- हस्ताक्षर/सिग्नेचर का मिलान 

- अँगूठे की छाप का निशान का मिलान 

- शरीर के 2 पहचान चिन्ह का मिलान 

- फोटो का मिलान

> दोषी/जालसाजी करने वाले लोगों के विरूद्ध कार्यवाही भी की जाती है।

> अब आपको वापस भेज दिया जाता है।

> पुरी तरह आश्वस्त होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची डॉजियर के साथ संबंधित रेलवे डिविजन को भेज दी जाती है।

[डॉजियर :- जब आप मेन इग्जाम पास कर जाते हैं, तो RRB हर अभ्यार्थी के लिये अलग–अलग फाईल में उससे संबंधित सारे रिकार्ड रख देती है। फाईल के ऊपर आपका नाम /रोलनंबर/पोस्ट etc लिखा जाता है]

आपके डाजियर में ये चीजें रहेंगी–

- आपका आवेदन पत्र 

- आपके एडमिट कार्ड की कटिंग (जो आपने परीक्षा रूम में दी थी)

- आपका OMR रिस्पान्स सीट 

- आपका फोटो

- आपका सिग्नेचर 

- आपका अँगूठे का निशान 

- सारे सर्टिफिकेट के फोटो कॉपी इत्यादि।

> अब कुछ दिनो के बाद RRB रोलनंबर, नाम, कैटेगरी के साथ चयनित अभ्यार्थी की फाईनल सूची जारी कर देता है। इस समय कोई एक्स्ट्रा 30% का नाम नही दिया जाता है।

{एक्स्ट्रा 30% अभ्यर्थी :- सफल अभ्यार्थियों के ना आने/मेडिकल अनफिट होने इत्यादि स्थिति में इन एक्स्ट्रा लोगों को ज्वाईनिंग लेटर भेजा जाता है। ये लेटर अगले एक साल के बीच कभी भी आ सकता है, और नही भी आ सकता है। इसकी कोई सूचना RRB के वेबसाईट पर नहीं दी जाती है}

>> फाइनली सिलेक्टेड लोगों को रेलवे डिविजन द्वारा ज्वाइनिंग लेटर भेजा जाता है।

- फिर मेडिकल टेस्ट होता है।

- फ़िर ट्रेनिंग 

- और फ़िर ड्यूटी सौंप दी जाती है।

मेरिट सूची, एवं पद वरीयता का महत्व :-

> आप किस पद पर चुने जायेंगे इसके जिम्मेदार केवल आप ही हैं।

> RRB केवल आपके वरीयता के क्रम और आपके मेरिट सूची के आधार पर ही आपको चुनती है।

> इसकी प्रक्रिया को समझने के मान लेते हैं

 की किसी RRB में 6 प्रकार के पद हैं.

CA, TA, GG, ECRC = इन चारों पदों के लिये केवल 2 चरण की परीक्षा है।

SM = इसके लिये सायको टेस्ट भी है।

JAA = इसके लिये टायपिंग टेस्ट भी है।

माना की हर प्रकार के पद 10 -10 की संख्या में है। कुल 60 पद हैं।

कुल 100 लोगों ने अप्लाई किया है।

(ऐसा आप मान लें, ताकि आप प्रक्रिया को समझ सकें , बाद में इसी आधार पर अपने RRB में अपनी स्थिति को आसानी से समझ सकते हैं )

अब सारे लोग अपनी अपनी पसंद के अनुसार क्रम निर्धारित करेंगे.

जैसे :-  

1) CA TA GG ECRC SM JAA

2) SM CA TA ECRC GG JAA

3) JAA CA TA ECRC GG SM

4) SM JAA CA TA ECRC JAA 

6) JAA SM CA TA ECRC GG

कुल 6 प्रकार के पदों को कुल 720 अलग अलग तरीकों से सजाया जा सकता हैं. अत: इतने अलग अलग तरह की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।

- कोई टायपिंग वाले पद को आगे रखेगा 

- कोई सायको वाले पद को आगे रखेगा 

- कोई अन्य पदों को आगे रखेगा 

अब माना की विभिन्न पदों का प्रारम्भिक कट आफ अगर ऐसा हुआ :-

CA :- 95%

TA :- 90%

ECRC :- 85%

GG :- 80%

SM :- 70%

JAA :- 60%

अब अगर किसी के 82% अंक आए और 

1) अगर उसका क्रम ऐसा है – CA TA GG ECRC SM JAA तो इनको CA TA ECRC नही मिलेगा। उसके ये योग्य नहीं। इनको गार्ड मिलेगा सायको/टायपिंग के लिये नहीं बुलाया जायेगा।

2) अगर उसका पसंद का क्रम ऐसा है – SM CA TA ECRC GG JAA तो उसका कट आफ गार्ड से अधिक है लेकिन उसको सायको के लिये बुलाया जायेगा क्योंकि उसने पहली वरीयता SM बनने की चुनी है। वो सायको फ़ेल हो गया तो गार्ड बनेगा।

(नोट :- इसिलिये सायको/टायपिंग के बाद ही GG TA CA ECTC का रिजल्ट देते हैं ताकि हाई मेरिट वाले लोग अगर सायको/टायपिंग में सफल ना हों तो उन्हें ये पद दिये जा सकें)

 3) अगर उसकी पसंद का क्रम ऐसा है – JAA CA TA ECRC GG SM तो उसे केवल टायपिंग के लिये बुलाया जायेगा। टाइपिंग क्वालीफाई करने पर वो JAA बनेगा। क्वालीफाई नहीं कर सका यो GG बन जायेगा क्योंकि उसने GG के कट आफ से अधिक मार्क्स/अंक प्राप्त किए हैं।


4) अगर उसकी पसंद का क्रम ऐसा है – SM JAA CA TA ECTC GG तो उसे सायको और टाइपिंग दोनों के लिये बुलाया जायेगा। दोनों पास करने पर अपनी पसंद के क्रम के आधार पर SM बनेगा। केवल एक पास करने पर कोई एक (SM/JAA - जो वो पास करेगा) बनेगा। दोनों में फ़ेल/अबसेन्ट करने पर वो GG बनेगा। 

5) अगर कोई व्यक्ति जो अपने काबिलियत के आधार पर 99% अंक लाता हैं और उसका पसंद का क्रम ऐसा है – SM JAA GG ECRC TA CA तो उसे सायको/टाइपिंग के लिये बुलाया जायेगा। क्योंकि SM, JAA उसकी प्राथमिकता क्रम में आगे हैं। यहां पर दो परिस्थितियां बनेंगी –

स्थिति -1) :- 

अगर वो सायको/टाइपिंग में ना जाये या जाकर भी क्वालीफाई ना करे तो उसको उसके तीसरे पसंद के आधार पर GG बनाया जायेगा। क्योंकि गलत वरीयता चुनने के कारण मेरिट सूची में आगे रहने के बावजूद उसे अधिक अच्छा पद नहीं मिलेगा। और यही है वरीयता सूची का महत्व।

स्थिति -2) :-

अगर वो सायको पास कर गया और SM बन गया लेकिन SM का मेडिकल स्टैंडर्ड A-2 पास ना कर पाया तो वो जॉब से बाहर हो जायेगा। जबकि, अगर वो CA पहले चुनके CA बन जाता और CA का मेडिकल स्टैंडर्ड C-1 पास करने में सक्षम रहता तो उसके लिये CA आगे चुनना अच्छा रहता।

सायको /टायपिंग के लिये बुलाये जाते समय TA CA ECRC GG का रिजल्ट नहीं आयेगा। ना कट-ऑफ आयेगा क्योंकि जो मेरिट में आगे हैं और SM JAA में छंट कर वापस GG TA CA ECRC बनेंगे वो इन चार पदों का कट आफ भी बदल देंगे।

 

कौन है स्टेशन मास्टर ?

कौन है स्टेशन मास्टर ?
    भारतीय रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारी जो बहुप्रशिक्षित,अत्यन्त समझदार, तीव्र बुद्धि वाला व्यक्ति होता है। सामान्यत: बहुआयामी कार्यों को अंजाम देने वाला और विपरीत परिस्थितियों में बिल्कुल सटीक निर्णय लेनेवाला महामानव है।
चयन कैसे होता है?
इसका चयन RRB के माध्यम से होता है।
डिविजन की आवश्यकता >
RRB को अनुदेश >
रिक्तियाँ प्रकाशित करना >
अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन >
परीक्षा(दो चरणों में) >
मनोवैग्यानिक परीक्षण >
प्रमाण पत्रों की जांच >
अन्तरिम चयन >
डिविजन को सौपना >
चिकित्सकिय जांच >
बाँड भरना >
ट्रेनिंग >
स्टेशन पे पदस्थापना।
[ बाँड :- आपको कोर्ट से एक बाँड पेपर बनवाकर देना होगा कि "आप 5 साल तक लगातार कार्य करेंगे और नौकरी छोड़ कर नही भागेंगे]
> ये बहुत आसान कार्य है।
> कोर्ट में नोटरी से बनवाना होगा।
> 200/- तक व्यय होगा।
> वकील सारा कार्य करवा देगा।
> 2 गवाहों की आवश्यकता होगी।
> ओरिजनल प्रति रेलवे को सौपनी होगी।
ट्रेनिंग कैसे होती है?
> आप रेलवे के किसी भी पद पर कार्य करें. उससे पहले समुचित ट्रेनिंग होती है।
> ट्रेनिंग रेलवे के जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में दी जाती है।
> ट्रेनिंग के बाद परीक्षा ली जाती है।
> पास होने के बाद आपके पद से संबंधित सक्षमता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है।
> अनुतीर्ण होने पर फ़िर से परीक्षा देना होगा। दोबारा से अनुत्तीर्ण होने पर नौकरी से बाहर जाईये।
> वर्तमान में देश के विभिन्न जोनों में SM की ट्रेनिंग 100 -120 दिन तक होती है।
> ट्रेनिंग के तहत SM के आपरेटिंग के कार्य के थ्योरी क्लासेस, प्रैक्टिकल क्लासेस और स्टेशन पे भेजकर भी ट्रेनिंग दी जाती है।
> ट्रेनिंग के दौरान आपको बेसिक पे दिया जाता है।

वेतन और अन्य सुविधायें :-
> अभी SM का बेसिक पे 4200 GP (6ठा वेतनमान के अनुसार) या 35,400 (7वां वेतनमान के अनुसार) हैं।
> इसमे महँगाई भत्ता, रात्रिकालीन ड्यूटी भत्ता, आवास भत्ता इत्यादि जोड़कर दिया जाता है।
> वर्तमान में आपको पहला वेतन 38,000/- के आस पास मिलेगा।
> आप चाहे तो रहने के लिये आवास/क्वार्टर मिलेगा।(क्वार्टर लेने पर आवास भत्ता नही मिलेगा)
> आपको आपके पत्नी, बच्चों, विधवा माँ, दिव्याँग/आश्रित/अविवाहित भाई-बहन के लिये सलाना एक पास(अप एंड डाऊन दोनों) और 4 पी.टी.ओ मिलेंगे।
(पास में 100% मुफ़्त यात्रा, पी.टी.ओ में यात्रा का 30% भाड़ा आप देंगे -70% रेलवे देगी।) 
> 5 साल की लगातार नौकरी के बाद प्रतिवर्ष 3 पास मिलेंगे।

सम्मान :–
स्टेशन मास्टर का समाज में आज भी बहुत सम्मान हैं. अगर आपका स्टेशन किसी गाँव में हैं तो आपका सम्मान किसी बैंक के शाखा पदाधिकारी/स्कूल के हेड मास्टर / VRO / सरपंच के समकक्ष ही होता है।

प्राथमिक कार्य :-
SM का मुख्य कार्य रेलगाड़ी को पिछले स्टेशन से लेकर अगले स्टेशन तक सकुशल पहुँचाना है। इसके अतिरिक्त छोटे स्टेशनो पर टिकट विक्रय करना भी है।
(अन्य कार्यों को विस्तार पूर्वक आगे समझेंगे, जब उनकी कठिनाईयों के बारे में पढ़ेंगे)

समस्याएं और कठिनाइयां :–
        मानता हूं कि भारत के अधिकांश सरकारी या प्राईवेट नौकरी में वर्क लोड, छुट्टी, सीनियर का दबाव इत्यादि बहुत सी समस्यायें हैं। बहुत से लोग दिन रात मेहनत कर रहें हैं। कुछ आराम भी फरमा रहे हैं। बैंक पीओ, पुलिस, लोको पायलेट, गार्ड इत्यादि की समस्याओं के बारे में सारा समाज जानता है। लेकिन स्टेशन मास्टर एक ऐसी उपेक्षित कैटगरी है जो दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन लोग उसे आराम करने वाले अधिकारी के तौर पे ही जानते हैं।

कार्य :–
> ब्लॉक इन्स्ट्रूमेंट, पैनल इत्यादि की सहायता से ट्रेनों के यातायात का प्रत्यक्ष प्रचालन करना।
> सारे सिग्नलों को आपरेट करना।
 (और बाहरी दुनिया के लोग समझते हैं की ये काम सिग्नल मेन्टेनर का है। जबकि उसका कार्य केवल नियमित समय पर सिग्नलो और संबंधित यन्त्रों का अनुरक्षण/मेन्टेनेंस करना एवं अचानक कुछ खराबी आने पर ठीक करना भर हैं)
कुछ मिलाकर अगर स्टेशन मास्टर कार्य करने वाला साफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो सिग्नल मेन्टेनर खराबी ठीक करने वाला हार्डवेयर इंजीनियर की भाँति हैं।
> बहुत सी डायरी और रजिस्टरों में इंट्री करना -ना केवल ट्रेन के यातयात बल्कि अन्य बातों के लिये भी 78 अलग अलग रजिस्टर होते हैं. एक भी इंट्री छूटने या गलत लिखे जाने पर चार्जशीट और पनिसमेंट का भय रहता है।
> रात में सारे सिग्नल स्टाफ़, गैंग स्टाफ, की मैन, आरपीएफ इत्यादि ड्यूटी पर भी‌ सोते मिलेंगे, काम करते हैं तो केवल स्टेशन मास्टर, कंट्रोलर, प्वाइंट्स मेन, गार्ड, और लोको पायलट।
रात के समय में जब आप AC कोच में सोते हुए यात्रा करते हैं और सुबह ट्रेन से उतरकर कहते हैं की की मैं लंबी यात्रा से थक गया और एक दिन आराम करूँगा, तभी आप अवश्य सोचिये आपके जैसा एक इंसान रात भर बिना एक मिनट बैठे लगातार 10 घंटे तक पूरे ऑफिस में और ऑफिस के बाहर बार बार दौड़ दौड़ कर काम करता रहता है।
अगर कोई इंसान एक रात किसी विवाह की बारात में जागता है तो अगले 2 दिनो तक दिन भर सोता ही रहता है।
और वहीं SM लगातार 7 दिनों तक नाइट ड्यूटी करते हैं।
 
SM का वास्त्विक कार्य तो दिल दहला देने वाला है :-
> मान लिजिये A B C D तीन लगातार स्टेशन हैं, और आप स्टेशन C के स्टेशन मास्टर हैं। तो,
> जैसे ही स्टेशन A से ट्रेन खुलेगी. स्टेशन B वाला SM एक मशीन का बटन दबायेगा. जिससे आपके स्टेशन पर एक घंटी बजेगी.
> आप तुरंत दौड़कर उस मशीन के पास जायेंगे और एक बटन दबायेंगे. जिससे उसके पास एक घंटी बजेगी।
> स्टेशन -B :- मेरे पास एक ट्रेन है, 12310 डाउन पटना राजधानी एक्सप्रेस, भेजना चाहता हूँ, अनुमति (लाईन क्लियर) दिजिये।
 आप (स्टेशन -C) :- आप 2 मिनट इन्तजार करें।
> आप 2 मिनट में स्टेशन B. और स्टेशन C के बीच के सारे रेलवे फाटक/गेट को बंद करवाते हैं और अन्य अनिवार्य बातों पर भी गौर करते हैं।
> अब आप पिछले स्टेशन-B को एक भारी मशीन की घुन्डी घुमाकर लाईन क्लीयर देंगे।
> आप लाइन क्लीयर देंगे उसके बाद ही वो सिग्नल को हरा (green light ) कर पायेगा. जिसे देखकर लोको पायलट ट्रेन उस स्टेशन -B को पार कर पायेगा।
> 5 - 7 मिनट के बाद ट्रेन उसके स्टेशन से बढकर जैसे ही आगे निकलेगी, आपके स्टेशन में एक मशीन से जोर से आवाज आने लगेगी।
> अब आप सेक्शन कंट्रौल को फ़ोन करेंगे कि क्या करना है?
वो बताएंगे कि ट्रेन को थ्रू करना है या, किसी अन्य ट्रेन के इंतजार में उसे लूप लाइन में रीसिव करके अगले आदेश तक रखना है।
(प्राय : गुड्स ट्रेन या, पैसेंजर ट्रेन को लूप में घुसा दिया जाता है और सुपरफास्ट ट्रेन को मैन लाईन से थ्रू किया जाता है।)
>थ्रू ट्रेन को SM दिन में अपने रूम से निकलकर झंडा (हरा/लाल) और रात में सिग्नल दिखाता है। ऐसा सिग्नल एक्सचेंज नही करने पर अगर कोई(LP या, GG) शिकायत कर दे तो दंड निर्धारित हैं।
[ जिन लोगों की आँखे दोषपूर्ण हैं या, कलर ब्लाइंड हैं वो लाल और हरा में भेद नही कर पाएंगे।
ऐसे में वो कैसे लाल या हरा सिग्नल / झंडा पहचानेंगे।
क्या वो ट्रेन में बैठे हजारो यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करेंगे?
अगर वो आगे ट्रेन होने पर भी लाल रंग को हरा समझ लाल (वास्तव में हरा) सिग्नल दे दें तो ट्रेन रूकने के बजाय दौड़ेगी और क्या होगा?
हालांकि हमारा सिग्नलिंग सिस्टम ऐसी गलती को नहीं होने देगा।
मेरी नेत्र दोष वाले भाईयों से हाथ जोड़ कर विनती है कि आप चालाकी करके SM चुने जाने के लिए अन्यायपूर्ण /अनैतिक प्रयास ना करें। सच्चाई को स्वीकारें और देशहित वाले कार्य ही करें।
> यही प्रक्रिया
 चलती रहती है और ट्रेन कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुँच जाती है।
> पर्व में छुटटी नहीं मिलती, मिलता है तो स्पेशल ट्रेन के रूप में अतिरिक्त वर्क लोड।
> छुट्टी की इतनी किल्लत हैं की पास -पीटीओ धरे ही रह जाते हैं। और अगर टिकट लिया तो अधिकतर कैंल ही कराना पड़ सकता है।
> हर ट्रेन को झंडा दिखाना (अगर ना दिखाया और ट्रेन में बैठे किसी अधिकारी ने देख लिया, या किसी कर्मचारी(LP या GG) ने शिकायत कर दी तो सजा मिलनी तय हैं।
ये सजा कम से कम साल भर या उससे भी अधिक दिन तक इंक्रीमेन्ट कट के रूप में मिलती हैं अर्थात कम से कम 24 हजार की हानि।
-भारत के 7800 रेलवे स्टेशन में से आज भी 5000 से ज्यादा स्टेशन में "स्टेशन मास्टर" को ही टिकट जारी करने का अतिरिक्त कार्य दिया गया है। जबकि टिकट लेने वालो की भीड़ बहुत बढ चुकी है। लोगों को टिकट देने में बक-झक होना आम बात है। इसी बीच अगर ट्रेन ऑपरेटिंग में देर हो जाये या किसी कमर्शियल कार्य में कुछ गलती हो जाये तो स्टेशन मास्टर को ही सज़ा मिलती है। आप विश्वास नही करेंगे ना केवल सिस्टम ओपेन कर टिकट बेचना होता है बल्कि उनका पक्का रिकार्ड भी रजिस्टर में तैयार करना होता हैं और अकॉउंट ऑफिस को भी भेजना होता है।
> बहुत बार तो बिजली/एलेक्ट्रिक की गड़बडी भी खुद ही ठीक करना होता हैं।
> रेलवे दुनिया की एक मात्र ऐसी नौकरी हैं जिसमे कई बार दूसरे की गलती की सजा आपको दी जाती है। और ऐसी सजा अक्सर SM को मिलती ही रहती है। अपनी गलती ना होने पर भी क्षमा याचना करनी पड़ती है।
> आम जिन्दगी में लोग लोग बहुत बार चाभी भूल जाते हैं, रुमाल भूल जाते हैं, कभी कलम तो कभी मोबाईल भूल जाते हैं। कुछ लोग चश्मा ढूँढते नज़र आते हैं।
बहुत बार SM अपने समय पे इंक्रिमेन्ट ना मिलने या कोई भत्ता ना मिलने के कारण ऑफिस जा जा कर अपनी चप्पलें घिसते हैं (वो भी नाइट ड्यूटी के बाद) और पता चलता है कि ये एक क्लर्क मिस्टेक है। जिसकी सजा क्लर्क को नहीं हमे मिलती है। अपने हक को पाने के लिये भी घूस देनी पड़ती है।
> लेकिन अधिक वर्क लोड के कारण, ऑफिस में लोगों की भीड़–भाड़ के कारण, कन्फयूजन के कारण या और भी किसी कारण से जीवन में केवल एक बार अगर कोई स्टेशन मास्टर कोई ग़लती कर जाये तो सज़ा मिलनी तय है। और अगर कोई दुर्घटना घट जाये तो नौकरी से हाथ धोने के अलावा बांकी जिन्दगी जेल में बितानी पड़ सकती है। सीधा धारा -302 (जानबूझकर की गयी हत्या) का मामला दर्ज होता हैं।
> हमारे पास रेलवे के 16 विभाग से जुडे अधिकार नाम मात्र होते हैं और जिम्मेदारी (कर्तव्य) असिमित होती है। किसी विभाग की गलती का खामियाजा उसके साथ साथ ऑनड्यूटी SM को भी मिलता है। जैसे सब्जी कुछ भी पके, नमक तो बर्बाद होगा ही। इस लिये हर स्टेशन मास्टर को हरफनमौला बनना पड़ता है।
> छुट्टी तो भूल ही जाइए, रेस्ट कब मिलेगा यही निश्चित नहीं होता। स्टाफ के अभाव में ओवरटाइम ड्यूटी करना और बिना रेस्ट के कई हफ्तों ड्यूटी करना आम बात है।
  स्टेशन मास्टर की ड्यूटी बच्चों का खेल नही है। एक आग का दरिया है। जिसे तैर के पार करना है।

" वास्तव में स्टेशन मास्टर भारतीय रेलवे का वो सच्चा सिपाही हैं जो फ्रंट पे जाके लड़ता है। और हर वार को सीने पे झेलता है।
  अगर आप ट्रेन में आराम से सो रहें हैं, ताश खेल रहे हैं, लैपटाप पे फ़िल्म देख रहे हैं, नौकरी ज्वाईन करने जा रहे हैं , पर्व में परिवार से मिलने जा रहे हैं , तो हमेशा याद रखें की जाने कितने SM, गार्ड, लोको पायलट, गेटमैन इत्यादि कितनी तकलीफ़ और कठिनाई में ड्यूटी कर रहें हैं।

 
"भारतीय रेलवे न डीजल से चलती हैं, ना इलेक्ट्रिक से चलती हैं , ये तो ओपन लाइन स्टाफ के खून और पसीने से चलती है।"

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