राजनीति और चुनाव चिन्ह
थका-हारा मजदूर अभी-अभी सोया था, नींद की पहली ही पारी में खोया था।
तभी उसके गाल पर जोरदार तमाचा पड़ा, हड़बड़ा कर मजदूर हो गया खड़ा।
मजदूर बोला- अरे चोरों मेरा सब कुछ ले जाओ, मगर कमबख्तों, अँधेरे में यूँ हाथ-पैर तो न चलाओ।
आदमी बोले- हम चोर नहीं हम तो कांग्रेसी हैं।
अगर अँधेरे में यूँ हाथ-पैर न चलायेंगे, तो तुझे अपना चुनाव चिन्ह कैसे बतायेंगे।
मजदूर बोला- अगर सभी दल यूँ प्रैक्टिस में अपना चुनाव चिन्ह बतलायेंगे,
तो हम कहाँ जायेंगे, हाथी-हथौड़े बाले आ गए तो हम मारे जायेंगे।
कांग्रेसी बोले- अब मजदूर तुझे हमें जिताना है,
और जितनी जोर से तेरे गाल पर तमाचा पड़ा है, उतनी जोर से हाथ के पंजे वाला बटन दबाना है।
तभी मजदूर ने देखा, दरवाजे पर त्रिशूल लिए एक महात्मा खड़ा था।
मजदूर बोला- बाबा आप भी उम्मीदवार हैं,
महात्मा बोला- हाँ बच्चा हम तेरे वोट के तलबगार हैं।
मजदूर बोला- पर क्या आपका चुनाव चिन्ह ये त्रिशूल है।
महात्मा बोला- नहीं बच्चा हमारा चुनाव चिन्ह तो कमल का फूल है, अगर वोट न दिया तो फिर यह त्रिशूल है।
अगर वोट न दिया तो तेरी अंतड़ियों में उतार देंगे, और
सीधा स्वर्ग सिधार देंगे,
कमल के फूल वाला ही बटन दबाना।
मजदूर के आँखों की गुल हो गयी बत्ती, धक्-धक् करने लगी छाती क्योंकि दरवाजे पर खड़ा था हाथी।
हाथी बोला – क्यों बे मजदूर तुझे कभी हमारा भी ख्याल आया है।
मजदूर बोला- माई-बाप आज कल तो आप और आपकी ही ‘माया’ है।
हम आपको भूल जाएँ हमारी क्या है औकात, हम जानते हैं आपके पंजे की त्रिज्या और अपने पेट का व्यास।
तभी कुछ देर बाद गले में बैलगाड़ी का पहिया डाले जनता दल वाले आये।
जनता दल वाले बोले- क्यों बे मजदूर आज तेरे दिल की
सारी हसरतें निकाल दें,
और अपने गले का भार तेरे गले में डाल देंं,
मजदूर बोला-नहीं माई-बाप उसे तो आप ही डाले रहिये, मुझे क्या करना है कहिये।
जनता दल वाले बोले- अगर खुद को पहिये के भार से
चाहता है बचाना,
तो वैलगाड़ी के पहिये वाला ही बटन दबाना।
मजदूर था हैरान, कैसे-कैसे प्रत्याशी, कैसे-कैसे निशान, लेकिन देखा विधि का विधान।
मजदूर वेचारा डर गया, और चुनाव वाले दिन बिना वोट
दिए ही मर गया.

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