नाजुक रिश्ता और ज़िम्मेदारी
ज्ञान विद आस्तिक में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है। यहां पर हम आपको आपके प्रश्नों का सरल शब्दों के द्वारा उत्तर देने का प्रयास करते हैं।
शनिवार, 25 मार्च 2023
नाजुक रिश्ता और ज़िम्मेदारी
मंगलवार, 21 मार्च 2023
राजनीति और चुनाव चिन्ह
राजनीति और चुनाव चिन्ह
थका-हारा मजदूर अभी-अभी सोया था, नींद की पहली ही पारी में खोया था।
तभी उसके गाल पर जोरदार तमाचा पड़ा, हड़बड़ा कर मजदूर हो गया खड़ा।
मजदूर बोला- अरे चोरों मेरा सब कुछ ले जाओ, मगर कमबख्तों, अँधेरे में यूँ हाथ-पैर तो न चलाओ।
आदमी बोले- हम चोर नहीं हम तो कांग्रेसी हैं।
अगर अँधेरे में यूँ हाथ-पैर न चलायेंगे, तो तुझे अपना चुनाव चिन्ह कैसे बतायेंगे।
मजदूर बोला- अगर सभी दल यूँ प्रैक्टिस में अपना चुनाव चिन्ह बतलायेंगे,
तो हम कहाँ जायेंगे, हाथी-हथौड़े बाले आ गए तो हम मारे जायेंगे।
कांग्रेसी बोले- अब मजदूर तुझे हमें जिताना है,
और जितनी जोर से तेरे गाल पर तमाचा पड़ा है, उतनी जोर से हाथ के पंजे वाला बटन दबाना है।
तभी मजदूर ने देखा, दरवाजे पर त्रिशूल लिए एक महात्मा खड़ा था।
मजदूर बोला- बाबा आप भी उम्मीदवार हैं,
महात्मा बोला- हाँ बच्चा हम तेरे वोट के तलबगार हैं।
मजदूर बोला- पर क्या आपका चुनाव चिन्ह ये त्रिशूल है।
महात्मा बोला- नहीं बच्चा हमारा चुनाव चिन्ह तो कमल का फूल है, अगर वोट न दिया तो फिर यह त्रिशूल है।
अगर वोट न दिया तो तेरी अंतड़ियों में उतार देंगे, और
सीधा स्वर्ग सिधार देंगे,
कमल के फूल वाला ही बटन दबाना।
मजदूर के आँखों की गुल हो गयी बत्ती, धक्-धक् करने लगी छाती क्योंकि दरवाजे पर खड़ा था हाथी।
हाथी बोला – क्यों बे मजदूर तुझे कभी हमारा भी ख्याल आया है।
मजदूर बोला- माई-बाप आज कल तो आप और आपकी ही ‘माया’ है।
हम आपको भूल जाएँ हमारी क्या है औकात, हम जानते हैं आपके पंजे की त्रिज्या और अपने पेट का व्यास।
तभी कुछ देर बाद गले में बैलगाड़ी का पहिया डाले जनता दल वाले आये।
जनता दल वाले बोले- क्यों बे मजदूर आज तेरे दिल की
सारी हसरतें निकाल दें,
और अपने गले का भार तेरे गले में डाल देंं,
मजदूर बोला-नहीं माई-बाप उसे तो आप ही डाले रहिये, मुझे क्या करना है कहिये।
जनता दल वाले बोले- अगर खुद को पहिये के भार से
चाहता है बचाना,
तो वैलगाड़ी के पहिये वाला ही बटन दबाना।
मजदूर था हैरान, कैसे-कैसे प्रत्याशी, कैसे-कैसे निशान, लेकिन देखा विधि का विधान।
मजदूर वेचारा डर गया, और चुनाव वाले दिन बिना वोट
दिए ही मर गया.
शुक्रवार, 3 मार्च 2023
क्या आपने कभी सोचा है कि मैं इस दुनियां में क्यों हूं?
क्या आपने कभी सोचा है कि मैं इस दुनियां में क्यों हूं?
हम सभी के मन में इस सवाल के विभिन्न उत्तर हो सकते हैं, क्योंकि हमने अपने लिए विभिन्न उद्देश्य बनाए हैं। कुछ इन्सान अपने उद्देश्यों को पूरा कर लेते हैं और कुछ परिस्थितियों और परेशानियों के कारण पूरा नहीं कर पाते। परन्तु मेरा मानना है कि हर इन्सान का प्राथमिक उद्देश्य ये होना चाहिए कि हमें इस संसार को और बेहतर सभी के रहने योग्य जगह बनाना है। बेहतर मतलब जहां इंसानियत, प्रेम, सद्भाव, दया एवं नैतिक मूल्यों वाले सज्जन इन्सान रहते हों। लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाते क्योंकि शायद ये बात दिमाग में नहीं आती या फिर हम करना नहीं चाहते। परन्तु क्या ये संभव है कि कोई अकेला इन्सान यह काम कर सकता है। नहीं। इसके लिए हर किसी को अपने स्तर पर प्रयास करना पड़ेगा। परन्तु हम अपने जीते जी क्या कर सकते हैं। हमें अपनी संतान को संस्कारवान बनाना होगा। कल्पना कीजिए कि इस समाज में चारों ओर अराजक, कामी, क्रोधी, झूठ, पाखंड, ईर्ष्या, द्वेष, लालच से भरे हुए लोग रह रहे हैं तो क्या ये दुनिया नरक से भी बदतर जगह नहीं हो जायेगी। ये बहुत मुश्किल भी है कि हम हर किसी को सुधार पाएं, सच्चाई तो ये है कि हम लोग खुद इन सब बुराइयों के शिकार हैं। तो कम से कम हमारे बाद आने वाली पीढ़ी को इन बुराइयों से बचा सकते हैं। जिससे कि इस दुनिया में उन्हें एक अच्छा सामाजिक परिवेश मिले। हमारे मां बाप ने यदि हमें अच्छी परवरिश नहीं दी होती तो क्या हम पृथ्वी पर बोझ के समान नहीं होते। मेरा मानना है कि हर पीढ़ी का ये उत्तरदायित्व होना चाहिए कि वो आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाए और अच्छी से अच्छी परवरिश दे जिससे ये दुनिया एक बेहतर जगह बन पाएगी और भविष्य में आने वाले लोग इसे और बेहतर बनायेंगे। और यदि हम इतना कर पाए तो हमारे जीवन का प्राथमिक उद्देश्य पूरा हो जाएगा और हमारा इस दुनिया में जन्म लेना सफल होगा।
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