शनिवार, 25 मार्च 2023

नाजुक रिश्ता और ज़िम्मेदारी

नाजुक रिश्ता और ज़िम्मेदारी

दुनिया में जो कुछ पाने लायक है उस पर वर्क करना पड़ता है। चाहे अच्छा करियर हो या अच्छे रिश्ते। कई बार लगता है बात नहीं बन पाएगी। और नहीं हो पाएगा। इसे छोड़ना पड़ेगा। मगर हम रिश्ते को ज़रूरी समझते हैं तो उसे बार-बार संवारते हैं। तब भी सामने वाले को मनाते हैं जब जानते थे कि हमारी गलती नहीं थी। तब भी हम सामने वाले को शर्मिंदा नहीं करते जब हम जानते थे कि उसी की गलती थी।

रिश्तों में कितनी ही बार ऐसा होता है जब आपको लगता है कि मैं इस आदमी के साथ नहीं रह सकती या मैं इस औरत के साथ नहीं रह सकता। मगर जैसे-तैसे खुद को संभाल के, अपने गुस्से को जज़्ब करके आप खुद को उस नाज़ुक पल से निकाल ले जाते हैं। फिर चीज़ें नॉर्मल हो जाती हैं और बाद में आपको इस बात का गर्व भी होता है कि कैसे उस नाजुक मौके पर मैं खुद पर काबू रख पाया।

कोई भी रिश्ता उन नाजुक मौकों पर खुद पर काबू रखने की एक लंबी श्रृंखला होता है। जिस रिश्ते पर 10-15 साल बाद आप गर्व करते हैं उसे आप न जाने कितने ही कमज़ोर क्षणों से बचाकर लाए होते हैं।

मगर Instant gratification (फौरी खुशी) के दौर पर में आज किसी में भी रिश्तों को वक्त देने का पेशंस नहीं। हर पहले झगड़े पर लगता है बहुत हो गया या ये इंसान मेरे लिए ठीक नहीं और आप Perfect इंसान की तलाश में Move on कर जाते हैं। वो Perfect इंसान जिसकी तलाश इंडियाना जोन्स के किसी खजाने से भी ज़्यादा मुश्किल है। जिसे ढूंढने के लिए आपके पास कोई नक्शा भी नहीं है। आप सिर्फ इस झूठे भरोसे से नए आदमी की तलाश में निकल पड़ते हैं ताकि उस रिश्ते से निकाल जाने के लिए खुद के सामने कोई रिवॉर्ड रख सकें।

इस सोच की वजह से आज रिश्ते आज रेडलाइट पर मिलने वाले किसी चाइनीज़ चार्जर से भी कम चलते हैं। मगर ऑनलाइन खाना और सामना ऑर्डर करने और रिश्तों में यही फर्क है। रिश्तों में कुछ भी Instant नहीं होता। यहां कुछ भी Tailor Made नहीं है। पसंद का सूट बनवाया जा सकता है मगर रिश्तों में समझ बनानी पड़ती है। यहां कोई आपका नाप नहीं लेगा बल्कि खुद आपको सामने वाले के दिल और समझ की गहराई नापनी होती है। उस रिश्ते की ज़िम्मेदारी लेनी होती है।

मगर ज़िम्मेदारी ऐसी चीज़ है कि न समझो तो इंसान अपने मां-बाप की भी नहीं समझता। समझो, तो सर्दी में नाइट ड्यूटी कर रहे गार्ड की भी फिक्र होती है। करियर में पीछे रह गए दोस्तों की भी चिंता होती है और अपने छोटे बच्चों को अकेला छोड़कर आने वाली कामवाली के लिए भी बुरा लगता है। आसपास मौजूद इतने सारे दुखों के बीच आप खुद को बेहद छोटा और असहाय पाते हैं। कामयाबी शायद कुछ और नहीं, बस अपने दायरे में आने वाले लोगों के दुखों की ज़िम्मेदारी उठा पाना है, न कि अपनी खुशियों में मगरूर रहकर हर किसी के प्रति आंख मूंद लेना, एक ज़रा सी बात पर उससे पिंड छुड़ा लेना। चले जाने का विकल्प हमेशा खुला होता है। साथ रहने के लिए बहुत कोशिश करनी पड़ती है। बशर्ते आप मानते हों कि साथ रहना ज़रूरी है। 
क्रेडिट–Neeraj Badhwar(लेखक–बातें कम scam ज्यादा)

मंगलवार, 21 मार्च 2023

राजनीति और चुनाव चिन्ह

 

राजनीति और चुनाव चिन्ह

थका-हारा मजदूर अभी-अभी सोया था, नींद की पहली ही पारी में खोया था।

तभी उसके गाल पर जोरदार तमाचा पड़ा, हड़बड़ा कर मजदूर हो गया खड़ा।

मजदूर बोला- अरे चोरों मेरा सब कुछ ले जाओ, मगर कमबख्तों, अँधेरे में यूँ हाथ-पैर तो न चलाओ।

आदमी बोले- हम चोर नहीं हम तो कांग्रेसी हैं।

अगर अँधेरे में यूँ हाथ-पैर न चलायेंगे, तो तुझे अपना चुनाव चिन्ह कैसे बतायेंगे।

मजदूर बोला- अगर सभी दल यूँ प्रैक्टिस में अपना चुनाव चिन्ह बतलायेंगे,

तो हम कहाँ जायेंगे, हाथी-हथौड़े बाले आ गए तो हम मारे जायेंगे।

कांग्रेसी बोले- अब मजदूर तुझे हमें जिताना है,

और जितनी जोर से तेरे गाल पर तमाचा पड़ा है, उतनी जोर से हाथ के पंजे वाला बटन दबाना है।

तभी मजदूर ने देखा, दरवाजे पर त्रिशूल लिए एक महात्मा खड़ा था।

मजदूर बोला- बाबा आप भी उम्मीदवार हैं,

महात्मा बोला- हाँ बच्चा हम तेरे वोट के तलबगार हैं।

मजदूर बोला- पर क्या आपका चुनाव चिन्ह ये त्रिशूल है।

महात्मा बोला- नहीं बच्चा हमारा चुनाव चिन्ह तो कमल का फूल है, अगर वोट न दिया तो फिर यह त्रिशूल है।

अगर वोट न दिया तो तेरी अंतड़ियों में उतार देंगे, और सीधा स्वर्ग सिधार देंगे,

कमल के फूल वाला ही बटन दबाना।

मजदूर के आँखों की गुल हो गयी बत्ती, धक्-धक् करने लगी छाती क्योंकि दरवाजे पर खड़ा था हाथी।

हाथी बोला – क्यों बे मजदूर तुझे कभी हमारा भी ख्याल आया है।

मजदूर बोला- माई-बाप आज कल तो आप और आपकी ही ‘माया’ है।

हम आपको भूल जाएँ हमारी क्या है औकात, हम जानते हैं आपके पंजे की त्रिज्या और अपने पेट का व्यास।

तभी कुछ देर बाद गले में बैलगाड़ी का पहिया डाले जनता दल वाले आये।

जनता दल वाले बोले- क्यों बे मजदूर आज तेरे दिल की सारी हसरतें निकाल दें,

और अपने गले का भार तेरे गले में डाल देंं,

मजदूर बोला-नहीं माई-बाप उसे तो आप ही डाले रहिये, मुझे क्या करना है कहिये।

जनता दल वाले बोले- अगर खुद को पहिये के भार से चाहता है बचाना,

तो वैलगाड़ी के पहिये वाला ही बटन दबाना।

मजदूर था हैरान, कैसे-कैसे प्रत्याशी, कैसे-कैसे निशान, लेकिन देखा विधि का विधान।

मजदूर वेचारा डर गया, और चुनाव वाले दिन बिना वोट दिए ही मर गया.


शुक्रवार, 3 मार्च 2023

क्या आपने कभी सोचा है कि मैं इस दुनियां में क्यों हूं?

 क्या आपने कभी सोचा है कि मैं इस दुनियां में क्यों हूं?

हम सभी के मन में इस सवाल के विभिन्न उत्तर हो सकते हैं, क्योंकि हमने अपने लिए विभिन्न उद्देश्य बनाए हैं। कुछ इन्सान अपने उद्देश्यों को पूरा कर लेते हैं और कुछ परिस्थितियों और परेशानियों के कारण पूरा नहीं कर पाते। परन्तु मेरा मानना है कि हर इन्सान का प्राथमिक उद्देश्य ये होना चाहिए कि हमें इस संसार को और बेहतर सभी के रहने योग्य जगह बनाना है। बेहतर मतलब जहां इंसानियत, प्रेम, सद्भाव, दया एवं नैतिक मूल्यों वाले सज्जन इन्सान रहते हों। लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाते क्योंकि शायद ये बात दिमाग में नहीं आती या फिर हम करना नहीं चाहते। परन्तु क्या ये संभव है कि कोई अकेला इन्सान यह काम  कर सकता है। नहीं। इसके लिए हर किसी को अपने स्तर पर प्रयास करना पड़ेगा। परन्तु हम अपने जीते जी क्या कर सकते हैं। हमें अपनी संतान को संस्कारवान बनाना होगा। कल्पना कीजिए कि इस समाज में चारों ओर अराजक, कामी, क्रोधी, झूठ, पाखंड, ईर्ष्या, द्वेष, लालच से भरे हुए लोग रह रहे हैं तो क्या ये दुनिया नरक से भी बदतर जगह नहीं हो जायेगी। ये बहुत मुश्किल भी है कि हम हर किसी को सुधार पाएं, सच्चाई तो ये है कि हम लोग खुद इन सब बुराइयों के शिकार हैं। तो कम से कम हमारे बाद आने वाली पीढ़ी को इन बुराइयों से बचा सकते हैं। जिससे कि इस दुनिया में उन्हें एक अच्छा सामाजिक परिवेश मिले। हमारे मां बाप ने यदि हमें अच्छी परवरिश नहीं दी होती तो क्या हम पृथ्वी पर बोझ के समान नहीं होते। मेरा मानना है कि हर पीढ़ी का ये उत्तरदायित्व होना चाहिए कि वो आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाए और अच्छी से अच्छी परवरिश दे जिससे ये दुनिया एक बेहतर जगह बन पाएगी और भविष्य में आने वाले लोग इसे और बेहतर बनायेंगे। और यदि हम इतना कर पाए तो हमारे जीवन का प्राथमिक उद्देश्य पूरा हो जाएगा और हमारा इस दुनिया में जन्म लेना सफल होगा।

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