रविवार, 13 नवंबर 2022

क्या भगवान राम जातिवादी थे?

विकास दिव्यकीर्ति सर आजकल किस विवादित विषय के कारण चर्चा में हैं?

विकास दिव्यकीर्ति सर दृष्टि इंस्टीट्यूट जो कि आईएएस के लिए तैयारी करवाती है उसके डायरेक्टर हैं। उन्होनें अपनी क्लास में बाल्मिकी रामायण के उत्तर कांड के एक प्रसंग का वर्णन किया, जिसके अनुसार भगवान राम ने शंभूक नामक एक शुद्र को सिर्फ इसलिए मृत्युदंड दिया क्योंकि उसने वेदपाठन करने का अपराध किया था। और उसके ऐसा करने से राज्य में अराजकता और प्राकृतिक आपदा का संभावित खतरा हो सकता था। इस प्रसंग के द्वारा ये सिद्ध होता है कि राम स्वयं जातिवादी थे। बस इसी बात का विवाद है कि उन्होंने जिस प्रसंग का जिक्र किया उसकी वास्तव में क्या प्रामाणिकता है। और यदि प्रामाणिकता है तो क्या भगवान राम सचमुच जातिवादी थे। 

वैसे यदि देखा जाए तो ये प्रसंग भगवान राम के व्यक्तित्व पर प्रश्न चिन्ह तो अवश्य डालता है, अब जहां तक प्रामाणिकता की बात है तो मेरे विचार से बाल्मिकी रामायण को तो बिल्कुल प्रामाणिक माना जाना चाहिए। परंतु इसमें जो उत्तरकांड है वो मुझे कहीं न कहीं संदेहास्पद लगता है। संदेह इस बात का है कि इसे स्वयं महर्षि बाल्मीकि ने नहीं बल्कि शायद बौद्ध धर्म प्रचारकों ने बड़ी साजिश द्वारा जबरदस्ती रामायण में थोप दिया। और बाद में गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में भी उसी आधार पर उत्तरकांड जोड़ दिया। अतः उत्तरकांड की विश्वसनीयता ही संदेहास्पद है। बाकी पाठकगण मेरे विचार से कितना सहमत हैं, अपनी राय टिप्पणी के माध्यम से अवश्य दें। और कृपया मुझे फॉलो करना न भूलें।

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