दोस्तों, आज आपको एक बात बताते हैं, पता है आपको? कोई बाहर का चिकित्सक उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बागपत, मुजफ्फर नगर, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद आदि किसी नगर में आकर औषधालय नहीं खोल सकता है,
क्यूँ ?
क्योंकि उसका क्लीनिक चलेगा ही नहीं।
कठिनाई ये है कि यहाँ के रोगी का रोग मात्र यहाँ का चिकित्सक ही समझ सकता है, और किसी के वश की बात नहीं।
कुछ रोग ऐसे हैं कि जैसे:
"गात म धूम्मा सा उठे" (आंतो मे मरोड़)
"जी कुलगुला" (घबराहट)
"आँखु म त झझल सी लिकडे " (आँख में जलन)
"गात में उचाटी सी लगरी "(आंतो मे गड़बड़)
"पेट मे धुड़क धुड़क हो री (वायु का प्रकोप)
"हरकत होरी गात में" (आंतो मे हलचल)
"कालजा लिकड़ लिकड़ जा (चक्कर आना)
"सिर मै चिड़िया सी बोल्ले "(उच्च रक्तचाप)
"गात मै तरेड़ सी पाटटे "(हृदय घबराना)
"नू होरा जण लठों ने पीट स्क्खी मझे (शरीर में पीड़ा)
"बस नू जी करे जुक्कर रोउ रोउ चली जउ (निम्न रक्तचाप)
"हाथ पाम म कीड़ी सी चलरीह (शरीर सुन हो जाना)
"पूरा दिन नू सिमझ में नई आत्ता के में के करू के नी" (ये समझ नहीं आ रहा है कि मैं करूँ तो क्या)
"जी कच्चा हो रहा" (उलटी आना)
और सबसे अंत में जिसका अर्थ तो कुछ स्थानीय चिकित्सक भी नहीं समझ पाए
"शरीर में दर्द नि होरा चस चस होरी"
कोई मुझे इसका अर्थ बताएगा?😊😊
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
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