गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

कौन है स्टेशन मास्टर ?

कौन है स्टेशन मास्टर ?
    भारतीय रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारी जो बहुप्रशिक्षित,अत्यन्त समझदार, तीव्र बुद्धि वाला व्यक्ति होता है। सामान्यत: बहुआयामी कार्यों को अंजाम देने वाला और विपरीत परिस्थितियों में बिल्कुल सटीक निर्णय लेनेवाला महामानव है।
चयन कैसे होता है?
इसका चयन RRB के माध्यम से होता है।
डिविजन की आवश्यकता >
RRB को अनुदेश >
रिक्तियाँ प्रकाशित करना >
अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन >
परीक्षा(दो चरणों में) >
मनोवैग्यानिक परीक्षण >
प्रमाण पत्रों की जांच >
अन्तरिम चयन >
डिविजन को सौपना >
चिकित्सकिय जांच >
बाँड भरना >
ट्रेनिंग >
स्टेशन पे पदस्थापना।
[ बाँड :- आपको कोर्ट से एक बाँड पेपर बनवाकर देना होगा कि "आप 5 साल तक लगातार कार्य करेंगे और नौकरी छोड़ कर नही भागेंगे]
> ये बहुत आसान कार्य है।
> कोर्ट में नोटरी से बनवाना होगा।
> 200/- तक व्यय होगा।
> वकील सारा कार्य करवा देगा।
> 2 गवाहों की आवश्यकता होगी।
> ओरिजनल प्रति रेलवे को सौपनी होगी।
ट्रेनिंग कैसे होती है?
> आप रेलवे के किसी भी पद पर कार्य करें. उससे पहले समुचित ट्रेनिंग होती है।
> ट्रेनिंग रेलवे के जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में दी जाती है।
> ट्रेनिंग के बाद परीक्षा ली जाती है।
> पास होने के बाद आपके पद से संबंधित सक्षमता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है।
> अनुतीर्ण होने पर फ़िर से परीक्षा देना होगा। दोबारा से अनुत्तीर्ण होने पर नौकरी से बाहर जाईये।
> वर्तमान में देश के विभिन्न जोनों में SM की ट्रेनिंग 100 -120 दिन तक होती है।
> ट्रेनिंग के तहत SM के आपरेटिंग के कार्य के थ्योरी क्लासेस, प्रैक्टिकल क्लासेस और स्टेशन पे भेजकर भी ट्रेनिंग दी जाती है।
> ट्रेनिंग के दौरान आपको बेसिक पे दिया जाता है।

वेतन और अन्य सुविधायें :-
> अभी SM का बेसिक पे 4200 GP (6ठा वेतनमान के अनुसार) या 35,400 (7वां वेतनमान के अनुसार) हैं।
> इसमे महँगाई भत्ता, रात्रिकालीन ड्यूटी भत्ता, आवास भत्ता इत्यादि जोड़कर दिया जाता है।
> वर्तमान में आपको पहला वेतन 38,000/- के आस पास मिलेगा।
> आप चाहे तो रहने के लिये आवास/क्वार्टर मिलेगा।(क्वार्टर लेने पर आवास भत्ता नही मिलेगा)
> आपको आपके पत्नी, बच्चों, विधवा माँ, दिव्याँग/आश्रित/अविवाहित भाई-बहन के लिये सलाना एक पास(अप एंड डाऊन दोनों) और 4 पी.टी.ओ मिलेंगे।
(पास में 100% मुफ़्त यात्रा, पी.टी.ओ में यात्रा का 30% भाड़ा आप देंगे -70% रेलवे देगी।) 
> 5 साल की लगातार नौकरी के बाद प्रतिवर्ष 3 पास मिलेंगे।

सम्मान :–
स्टेशन मास्टर का समाज में आज भी बहुत सम्मान हैं. अगर आपका स्टेशन किसी गाँव में हैं तो आपका सम्मान किसी बैंक के शाखा पदाधिकारी/स्कूल के हेड मास्टर / VRO / सरपंच के समकक्ष ही होता है।

प्राथमिक कार्य :-
SM का मुख्य कार्य रेलगाड़ी को पिछले स्टेशन से लेकर अगले स्टेशन तक सकुशल पहुँचाना है। इसके अतिरिक्त छोटे स्टेशनो पर टिकट विक्रय करना भी है।
(अन्य कार्यों को विस्तार पूर्वक आगे समझेंगे, जब उनकी कठिनाईयों के बारे में पढ़ेंगे)

समस्याएं और कठिनाइयां :–
        मानता हूं कि भारत के अधिकांश सरकारी या प्राईवेट नौकरी में वर्क लोड, छुट्टी, सीनियर का दबाव इत्यादि बहुत सी समस्यायें हैं। बहुत से लोग दिन रात मेहनत कर रहें हैं। कुछ आराम भी फरमा रहे हैं। बैंक पीओ, पुलिस, लोको पायलेट, गार्ड इत्यादि की समस्याओं के बारे में सारा समाज जानता है। लेकिन स्टेशन मास्टर एक ऐसी उपेक्षित कैटगरी है जो दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन लोग उसे आराम करने वाले अधिकारी के तौर पे ही जानते हैं।

कार्य :–
> ब्लॉक इन्स्ट्रूमेंट, पैनल इत्यादि की सहायता से ट्रेनों के यातायात का प्रत्यक्ष प्रचालन करना।
> सारे सिग्नलों को आपरेट करना।
 (और बाहरी दुनिया के लोग समझते हैं की ये काम सिग्नल मेन्टेनर का है। जबकि उसका कार्य केवल नियमित समय पर सिग्नलो और संबंधित यन्त्रों का अनुरक्षण/मेन्टेनेंस करना एवं अचानक कुछ खराबी आने पर ठीक करना भर हैं)
कुछ मिलाकर अगर स्टेशन मास्टर कार्य करने वाला साफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो सिग्नल मेन्टेनर खराबी ठीक करने वाला हार्डवेयर इंजीनियर की भाँति हैं।
> बहुत सी डायरी और रजिस्टरों में इंट्री करना -ना केवल ट्रेन के यातयात बल्कि अन्य बातों के लिये भी 78 अलग अलग रजिस्टर होते हैं. एक भी इंट्री छूटने या गलत लिखे जाने पर चार्जशीट और पनिसमेंट का भय रहता है।
> रात में सारे सिग्नल स्टाफ़, गैंग स्टाफ, की मैन, आरपीएफ इत्यादि ड्यूटी पर भी‌ सोते मिलेंगे, काम करते हैं तो केवल स्टेशन मास्टर, कंट्रोलर, प्वाइंट्स मेन, गार्ड, और लोको पायलट।
रात के समय में जब आप AC कोच में सोते हुए यात्रा करते हैं और सुबह ट्रेन से उतरकर कहते हैं की की मैं लंबी यात्रा से थक गया और एक दिन आराम करूँगा, तभी आप अवश्य सोचिये आपके जैसा एक इंसान रात भर बिना एक मिनट बैठे लगातार 10 घंटे तक पूरे ऑफिस में और ऑफिस के बाहर बार बार दौड़ दौड़ कर काम करता रहता है।
अगर कोई इंसान एक रात किसी विवाह की बारात में जागता है तो अगले 2 दिनो तक दिन भर सोता ही रहता है।
और वहीं SM लगातार 7 दिनों तक नाइट ड्यूटी करते हैं।
 
SM का वास्त्विक कार्य तो दिल दहला देने वाला है :-
> मान लिजिये A B C D तीन लगातार स्टेशन हैं, और आप स्टेशन C के स्टेशन मास्टर हैं। तो,
> जैसे ही स्टेशन A से ट्रेन खुलेगी. स्टेशन B वाला SM एक मशीन का बटन दबायेगा. जिससे आपके स्टेशन पर एक घंटी बजेगी.
> आप तुरंत दौड़कर उस मशीन के पास जायेंगे और एक बटन दबायेंगे. जिससे उसके पास एक घंटी बजेगी।
> स्टेशन -B :- मेरे पास एक ट्रेन है, 12310 डाउन पटना राजधानी एक्सप्रेस, भेजना चाहता हूँ, अनुमति (लाईन क्लियर) दिजिये।
 आप (स्टेशन -C) :- आप 2 मिनट इन्तजार करें।
> आप 2 मिनट में स्टेशन B. और स्टेशन C के बीच के सारे रेलवे फाटक/गेट को बंद करवाते हैं और अन्य अनिवार्य बातों पर भी गौर करते हैं।
> अब आप पिछले स्टेशन-B को एक भारी मशीन की घुन्डी घुमाकर लाईन क्लीयर देंगे।
> आप लाइन क्लीयर देंगे उसके बाद ही वो सिग्नल को हरा (green light ) कर पायेगा. जिसे देखकर लोको पायलट ट्रेन उस स्टेशन -B को पार कर पायेगा।
> 5 - 7 मिनट के बाद ट्रेन उसके स्टेशन से बढकर जैसे ही आगे निकलेगी, आपके स्टेशन में एक मशीन से जोर से आवाज आने लगेगी।
> अब आप सेक्शन कंट्रौल को फ़ोन करेंगे कि क्या करना है?
वो बताएंगे कि ट्रेन को थ्रू करना है या, किसी अन्य ट्रेन के इंतजार में उसे लूप लाइन में रीसिव करके अगले आदेश तक रखना है।
(प्राय : गुड्स ट्रेन या, पैसेंजर ट्रेन को लूप में घुसा दिया जाता है और सुपरफास्ट ट्रेन को मैन लाईन से थ्रू किया जाता है।)
>थ्रू ट्रेन को SM दिन में अपने रूम से निकलकर झंडा (हरा/लाल) और रात में सिग्नल दिखाता है। ऐसा सिग्नल एक्सचेंज नही करने पर अगर कोई(LP या, GG) शिकायत कर दे तो दंड निर्धारित हैं।
[ जिन लोगों की आँखे दोषपूर्ण हैं या, कलर ब्लाइंड हैं वो लाल और हरा में भेद नही कर पाएंगे।
ऐसे में वो कैसे लाल या हरा सिग्नल / झंडा पहचानेंगे।
क्या वो ट्रेन में बैठे हजारो यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करेंगे?
अगर वो आगे ट्रेन होने पर भी लाल रंग को हरा समझ लाल (वास्तव में हरा) सिग्नल दे दें तो ट्रेन रूकने के बजाय दौड़ेगी और क्या होगा?
हालांकि हमारा सिग्नलिंग सिस्टम ऐसी गलती को नहीं होने देगा।
मेरी नेत्र दोष वाले भाईयों से हाथ जोड़ कर विनती है कि आप चालाकी करके SM चुने जाने के लिए अन्यायपूर्ण /अनैतिक प्रयास ना करें। सच्चाई को स्वीकारें और देशहित वाले कार्य ही करें।
> यही प्रक्रिया
 चलती रहती है और ट्रेन कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुँच जाती है।
> पर्व में छुटटी नहीं मिलती, मिलता है तो स्पेशल ट्रेन के रूप में अतिरिक्त वर्क लोड।
> छुट्टी की इतनी किल्लत हैं की पास -पीटीओ धरे ही रह जाते हैं। और अगर टिकट लिया तो अधिकतर कैंल ही कराना पड़ सकता है।
> हर ट्रेन को झंडा दिखाना (अगर ना दिखाया और ट्रेन में बैठे किसी अधिकारी ने देख लिया, या किसी कर्मचारी(LP या GG) ने शिकायत कर दी तो सजा मिलनी तय हैं।
ये सजा कम से कम साल भर या उससे भी अधिक दिन तक इंक्रीमेन्ट कट के रूप में मिलती हैं अर्थात कम से कम 24 हजार की हानि।
-भारत के 7800 रेलवे स्टेशन में से आज भी 5000 से ज्यादा स्टेशन में "स्टेशन मास्टर" को ही टिकट जारी करने का अतिरिक्त कार्य दिया गया है। जबकि टिकट लेने वालो की भीड़ बहुत बढ चुकी है। लोगों को टिकट देने में बक-झक होना आम बात है। इसी बीच अगर ट्रेन ऑपरेटिंग में देर हो जाये या किसी कमर्शियल कार्य में कुछ गलती हो जाये तो स्टेशन मास्टर को ही सज़ा मिलती है। आप विश्वास नही करेंगे ना केवल सिस्टम ओपेन कर टिकट बेचना होता है बल्कि उनका पक्का रिकार्ड भी रजिस्टर में तैयार करना होता हैं और अकॉउंट ऑफिस को भी भेजना होता है।
> बहुत बार तो बिजली/एलेक्ट्रिक की गड़बडी भी खुद ही ठीक करना होता हैं।
> रेलवे दुनिया की एक मात्र ऐसी नौकरी हैं जिसमे कई बार दूसरे की गलती की सजा आपको दी जाती है। और ऐसी सजा अक्सर SM को मिलती ही रहती है। अपनी गलती ना होने पर भी क्षमा याचना करनी पड़ती है।
> आम जिन्दगी में लोग लोग बहुत बार चाभी भूल जाते हैं, रुमाल भूल जाते हैं, कभी कलम तो कभी मोबाईल भूल जाते हैं। कुछ लोग चश्मा ढूँढते नज़र आते हैं।
बहुत बार SM अपने समय पे इंक्रिमेन्ट ना मिलने या कोई भत्ता ना मिलने के कारण ऑफिस जा जा कर अपनी चप्पलें घिसते हैं (वो भी नाइट ड्यूटी के बाद) और पता चलता है कि ये एक क्लर्क मिस्टेक है। जिसकी सजा क्लर्क को नहीं हमे मिलती है। अपने हक को पाने के लिये भी घूस देनी पड़ती है।
> लेकिन अधिक वर्क लोड के कारण, ऑफिस में लोगों की भीड़–भाड़ के कारण, कन्फयूजन के कारण या और भी किसी कारण से जीवन में केवल एक बार अगर कोई स्टेशन मास्टर कोई ग़लती कर जाये तो सज़ा मिलनी तय है। और अगर कोई दुर्घटना घट जाये तो नौकरी से हाथ धोने के अलावा बांकी जिन्दगी जेल में बितानी पड़ सकती है। सीधा धारा -302 (जानबूझकर की गयी हत्या) का मामला दर्ज होता हैं।
> हमारे पास रेलवे के 16 विभाग से जुडे अधिकार नाम मात्र होते हैं और जिम्मेदारी (कर्तव्य) असिमित होती है। किसी विभाग की गलती का खामियाजा उसके साथ साथ ऑनड्यूटी SM को भी मिलता है। जैसे सब्जी कुछ भी पके, नमक तो बर्बाद होगा ही। इस लिये हर स्टेशन मास्टर को हरफनमौला बनना पड़ता है।
> छुट्टी तो भूल ही जाइए, रेस्ट कब मिलेगा यही निश्चित नहीं होता। स्टाफ के अभाव में ओवरटाइम ड्यूटी करना और बिना रेस्ट के कई हफ्तों ड्यूटी करना आम बात है।
  स्टेशन मास्टर की ड्यूटी बच्चों का खेल नही है। एक आग का दरिया है। जिसे तैर के पार करना है।

" वास्तव में स्टेशन मास्टर भारतीय रेलवे का वो सच्चा सिपाही हैं जो फ्रंट पे जाके लड़ता है। और हर वार को सीने पे झेलता है।
  अगर आप ट्रेन में आराम से सो रहें हैं, ताश खेल रहे हैं, लैपटाप पे फ़िल्म देख रहे हैं, नौकरी ज्वाईन करने जा रहे हैं , पर्व में परिवार से मिलने जा रहे हैं , तो हमेशा याद रखें की जाने कितने SM, गार्ड, लोको पायलट, गेटमैन इत्यादि कितनी तकलीफ़ और कठिनाई में ड्यूटी कर रहें हैं।

 
"भारतीय रेलवे न डीजल से चलती हैं, ना इलेक्ट्रिक से चलती हैं , ये तो ओपन लाइन स्टाफ के खून और पसीने से चलती है।"

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