राम नाम के साबुन से, जो मन का मेल छुड़ाएगा | निर्मल मन के दर्पण में, वह राम का दर्शन पाएगा || (२)
नर शरीर अनमोल रे प्राणी, प्रभु कृपा से पाया है। झूठे जग प्रपंच में पड़कर क्यों प्रभु को विसराया है || (२)
समय हाथ से निकल गया तो...... (२) सिर धुन धुन पछताएगा |
निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा |
राम नाम के साबुन से जो मन का मेल छुड़ाएगा | निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा ||
झूठ कपट निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्यार करो । घर पर आए अतिथि कोई तो यथा शक्ति सत्कार करो || (२)
क्यों ?
पता नहीं किस रूप में आकर ....... (२) नारायण मिल जाएगा |
निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा |
राम नाम के साबुन से जो मन का मेल छुड़ाएगा | निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा ||
साधन तेरा कच्चा है, जब तक प्रभु पर विश्वास नहीं। मंजिल कर पाना है, क्या जब दीपक में परकाश नहीं || (२)
निश्चय है तो भवसागर से....... (२) बेडा पार हो जाएगा |
निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा |
राम नाम के साबुन से जो मन का मेल छुड़ाएगा | निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा ||
दौलत का अभिमान है झूठा, यह तो आनी जानी है। राजा रंक अनेकों हुए, कितनों की सुनी कहानी है || (२)
राम नाम प्रिय महा मन्त्र ही....... (२) साथ तुम्हारे जाएगा |
निर्मल मन के दर्पण में वह, राम का दर्शन पाएगा |
राम नाम के साबुन से जो......(२) मन का मेल छुड़ाएगा ।
निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा |
राम नाम के साबुन से जो मन का मेल छुड़ाएगा | निर्मल मन के दर्पण में वह राम का दर्शन पाएगा ||
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