क्या है धर्म, भगवान का अस्तित्व एवं सच्चाई?
![]() |
| धर्म और भगवान का अस्तित्व |
अ अपने धर्म और भगवान को श्रेष्ठ मानता है।
ब अपने धर्म और भगवान को श्रेष्ठ मानता है।
जबकि अ और ब दोनों धर्म और भगवान के बारे में कुछ नहीं जानते।
ब, अ की बातों में आ जाता है और द ब की बातों में आ जाता है।
ब और द धर्म और भगवान के बारे में कुतर्क करके झगड़ने लगते हैं।
जबकि अ या स और ब या द धर्म और भगवान के बारे में कुछ नहीं जानते।
इन चारों की बातें सुनकर के अपना नया धर्म और भगवान बना लेता है और ख ,ग,घ को नये भगवान और धर्म की खूबियां बताया है।
जबकि क, ख ,ग,घ इनके बारे में कुछ नहीं जानते।
अ की लोकप्रियता देख च भी ऐसा करता है और छ, ज, द को अपना चेला बना लेता है।
यह सिलसिला त से लेकर ष तक जारी रहता है ।
फिर क और स मिलकर धर्म परिवर्तन करके क्ष हो जाते हैं।
त और र मिलकर त्र हो जाते हैं। ज और ञ मिलकर ज्ञ हो जाते हैं। श और र मिलकर श्र हो जातें हैं।
जबकि अ से लेकर ज्ञ तक कोई धर्म और भगवान के बारे में कुछ भी नहीं जानते।
जबकि सच्चाई यह है कि अ के बिना इनमें से किसी का अस्तित्व नहीं है। लेकिन किसी को भी अपने अंदर अ का अस्तित्व दिखाई नहीं देता।
By gyanwithastik
यदि पेज पसंद आया हो तो कृपया लाइक कमेंट एवं पेज को फॉलो करना न भूलें।

Good
जवाब देंहटाएंभाई, क्या है धर्म की सर्व मान्य परिभाषा?
जवाब देंहटाएंक्या कालाहारी के आदिवासियों और वेटिकन सिटी के पादरी के धर्म समान हैं या अलग अलग?
मैं भी इस प्रश्न का जवाब देने के योग्य अपने आप को नहीं समझता, फिर भी इस प्रश्न के उत्तर की जानकारी के लिए आप उपनिषदों का अध्ययन कर सकते हैं। बाकी इस दुनिया में इस प्रश्न का कोई प्रामाणिक सर्वमान्य उत्तर मिलना तो बहुत मुश्किल है।
जवाब देंहटाएं